संयुक्त राष्ट्र में मौलाना मसूद अज़हर को 'वैश्विक आतंकी' घोषित किए
जाने के बाद पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर संयुक्त
राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल
उठाए हैं.
पाकिस्तान ने कहा है कि यह समिति सर्वसम्मति से फ़ैसला लेती है और जब कोई समस्या होती है तो किसी फ़ैसले पर तकनीकी रोक लगा दी जाती है और मौलाना मसूद अज़हर के मामले में यह होता आया था.
पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि इस मामले में राजनीतिक कोशिशें की गई हैं और समिति की गोपनीय कार्रवाइयों को ख़ासतौर पर भारतीय मीडिया में लीक किया गया. पाकिस्तान ने कहा कि वह मानता है आतंकवाद दुनिया के लिए ख़तरा है जिसमें भारत प्रशासित कश्मीर में लोगों के ख़िलाफ़ राज्य प्रायोजित आतंकवाद भी है.
इसके साथ ही पाकिस्तान ने कहा है कि भारतीय मीडिया इसको अपनी 'जीत' बताएगा जो बिलकुल झूठ और निराधार है. हालांकि, पाकिस्तान ने आगे कहा है कि वह मानता है कि उसकी ज़मीन से आतंक फैलाने वाले संगठन के लिए उसके यहां कोई जगह नहीं है और आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए उनका संकल्प है.
मौलान मसूद अज़हर को 'वैश्विक आतंकी' की सूची में शामिल करने पर चीन रोक लगाता रहा है लेकिन इस बार उसने इस पर आपत्ति नहीं जताई है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि संबंधित देशों ने जब इससे जुड़ी संशोधित सामग्री को दोबारा पेश किया तो बारीकी से निरीक्षण के बाद इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई.
चीन ने कहा है, "इस मुद्दे का निपटारा फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी सहयोग को दर्शाता है, हमें प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र के निकायों के नियमों और प्रक्रियाओं को बरकरार रखना होगा, परस्पर सम्मान के सिद्धांत का पालन करना होगा, बातचीत के ज़रिए आपसी मतभेदों को सुलझाते हुए आम सहमति बनानी होगी और तकनीकी मुद्दों के राजनीतिकरण को रोकना होगा."
इसके अलावा चीन ने अपने मित्र देश पाकिस्तान का एक बार फिर समर्थन किया है. चीन का कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में बड़ा योगदान दिया है जिसको अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मान्यता देनी चाहिए.
साथ ही चीन ने कहा है कि आतंकवाद और चरमपंथ ताक़तों से लड़ने की पाकिस्तान की कोशिशों को वह समर्थन देता रहेगा.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बयान जारी किया है जिसमें उसने बताया है कि मौलाना मसूद अज़हर अल-क़ायदा से जुड़े रहे हैं जिसमें उन्होंने योजना बनाने, पैसा इकट्ठा करने, हथियार और अन्य साज़ो-सामान को बेचने या उन्हें स्थानांतरित करने का काम किया है.
बयान में कहा गया है कि मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की थी और अल-क़ायदा, ओसामा बिन लादेन और तालिबान से जुड़े होने के कारण जैश-ए-मोहम्मद पर 17 अक्तूबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगा दिया था.
साथ ही मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना से उसको आर्थिक रूप से मदद दी थी.
वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई ने सैयद अकबरुद्दीन का एक वीडियो भी ट्वीट किया जिसमें वह इंडोनेशिया के संयुक्त राष्ट्र में स्थाई राजदूत को धन्यवाद दे रहे हैं.
पाकिस्तान ने कहा है कि यह समिति सर्वसम्मति से फ़ैसला लेती है और जब कोई समस्या होती है तो किसी फ़ैसले पर तकनीकी रोक लगा दी जाती है और मौलाना मसूद अज़हर के मामले में यह होता आया था.
पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि इस मामले में राजनीतिक कोशिशें की गई हैं और समिति की गोपनीय कार्रवाइयों को ख़ासतौर पर भारतीय मीडिया में लीक किया गया. पाकिस्तान ने कहा कि वह मानता है आतंकवाद दुनिया के लिए ख़तरा है जिसमें भारत प्रशासित कश्मीर में लोगों के ख़िलाफ़ राज्य प्रायोजित आतंकवाद भी है.
इसके साथ ही पाकिस्तान ने कहा है कि भारतीय मीडिया इसको अपनी 'जीत' बताएगा जो बिलकुल झूठ और निराधार है. हालांकि, पाकिस्तान ने आगे कहा है कि वह मानता है कि उसकी ज़मीन से आतंक फैलाने वाले संगठन के लिए उसके यहां कोई जगह नहीं है और आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए उनका संकल्प है.
मौलान मसूद अज़हर को 'वैश्विक आतंकी' की सूची में शामिल करने पर चीन रोक लगाता रहा है लेकिन इस बार उसने इस पर आपत्ति नहीं जताई है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि संबंधित देशों ने जब इससे जुड़ी संशोधित सामग्री को दोबारा पेश किया तो बारीकी से निरीक्षण के बाद इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई.
चीन ने कहा है, "इस मुद्दे का निपटारा फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी सहयोग को दर्शाता है, हमें प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र के निकायों के नियमों और प्रक्रियाओं को बरकरार रखना होगा, परस्पर सम्मान के सिद्धांत का पालन करना होगा, बातचीत के ज़रिए आपसी मतभेदों को सुलझाते हुए आम सहमति बनानी होगी और तकनीकी मुद्दों के राजनीतिकरण को रोकना होगा."
इसके अलावा चीन ने अपने मित्र देश पाकिस्तान का एक बार फिर समर्थन किया है. चीन का कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में बड़ा योगदान दिया है जिसको अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मान्यता देनी चाहिए.
साथ ही चीन ने कहा है कि आतंकवाद और चरमपंथ ताक़तों से लड़ने की पाकिस्तान की कोशिशों को वह समर्थन देता रहेगा.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बयान जारी किया है जिसमें उसने बताया है कि मौलाना मसूद अज़हर अल-क़ायदा से जुड़े रहे हैं जिसमें उन्होंने योजना बनाने, पैसा इकट्ठा करने, हथियार और अन्य साज़ो-सामान को बेचने या उन्हें स्थानांतरित करने का काम किया है.
बयान में कहा गया है कि मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की थी और अल-क़ायदा, ओसामा बिन लादेन और तालिबान से जुड़े होने के कारण जैश-ए-मोहम्मद पर 17 अक्तूबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगा दिया था.
साथ ही मसूद अज़हर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना से उसको आर्थिक रूप से मदद दी थी.
वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई ने सैयद अकबरुद्दीन का एक वीडियो भी ट्वीट किया जिसमें वह इंडोनेशिया के संयुक्त राष्ट्र में स्थाई राजदूत को धन्यवाद दे रहे हैं.
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